- उज्जैन के गजनीखेड़ी में प्रशासन की चौपाल: कलेक्टर-SP ने रात गांव में बिताई, मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया
- सुबह 4 बजे खुले कपाट: बाबा महाकाल का दूध-दही-घी से अभिषेक, भक्ति में डूबे श्रद्धालु
- उज्जैन में दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल: दूल्हे ने लौटाए 50 लाख के कैश और सोना, सिर्फ अंगूठी ली
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर खुले चांदी द्वार, बाबा का हुआ पंचामृत अभिषेक
- सिंहस्थ के लिए पुलिस को तैयार कर रहा प्रशासन: उज्जैन में पुलिस अफसरों की 21 दिन की खास ट्रेनिंग शुरू, 41 विषयों पर रहेगा फोकस; 117 अधिकारी बनेंगे “मास्टर ट्रेनर”
गुरुपूर्णिमा का महापर्व 10 जुलाई को: सांदीपनि आश्रम में होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान, मंदिर की ध्वजा भी बदली जाएगी!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में गुरुपूर्णिमा का महापर्व 10 जुलाई को श्रद्धा, परंपरा और आध्यात्म की भावना के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर सांदीपनि आश्रम में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और संस्कारों का आयोजन होगा, जहां भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के गुरु महर्षि सांदीपनि की परंपरा को जीवंत किया जाएगा। गुरुपूर्णिमा के दिन सुबह वेदपाठी ब्राह्मण महर्षि सांदीपनि, श्रीकृष्ण और बलराम की प्रतिमाओं का जलाभिषेक करेंगे। इसके पश्चात भगवान को नववस्त्र धारण कराए जाएंगे और मंदिर की ध्वजा भी बदली जाएगी, जो शुभता और नव ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
इस मौके पर बचपन से विद्या की ओर पहला कदम रखने वाले नन्हे बच्चों का ‘विद्यारंभ संस्कार’ भी किया जाएगा, जिसे हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। बच्चों की पहली स्लेट (पाटी) और लेखन सामग्री का विधिपूर्वक पूजन किया जाएगा, जिसमें उनके माता-पिता भी श्रद्धा भाव से शामिल होंगे।
इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी और विश्वविद्यालयों के कुलगुरु आश्रम में विधिवत पूजन और आरती करेंगे। शहर के गुरुकुल, वेद विद्यालयों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में भी गुरुओं का पूजन किया जाएगा और गुरुपाद सेवा वंदना का आयोजन होगा। वहीं, गायत्री शक्तिपीठ पर ‘सजल श्रद्धा, प्रखर प्रज्ञा’ के पूजन के साथ-साथ गायत्री मंत्र दीक्षा और अन्य वैदिक संस्कार भी संपन्न होंगे।
सांदीपनि आश्रम का महत्व इसलिए भी और बढ़ जाता है क्योंकि मान्यता है कि द्वापर युग में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने यहीं रहकर शिक्षा प्राप्त की थी। गुरुपूर्णिमा पर गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की जो परंपरा है, वह यहीं से हजारों वर्षों से चली आ रही है। कलियुग में भी इस परंपरा को भक्तगण श्रद्धापूर्वक निभा रहे हैं।
पूरे आश्रम परिसर को फूलों और पारंपरिक सजावट से सजाया जाएगा, जिससे श्रद्धालु आध्यात्मिक वातावरण में डूबकर गुरु के महत्व को अनुभव कर सकें। इस दिन उज्जैन की धरती पर गुरुओं की वंदना, वेद मंत्रों की गूंज और शिष्य भाव की आस्था एक दिव्य समागम रचेंगे।